कथावाचक युवराज पांडे का छलका दर्द: सुरक्षा न मिलने पर प्रशासन पर उठाए सवाल, बोले – “छत्तीसगढ़िया होना ही क्या हमारी गलती है?”





रायपुर के सेजबहार (खिलोरा) क्षेत्र में चल रही शिव महापुराण कथा के दौरान प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य रामानुज युवराज पांडे का दर्द मंच से छलक पड़ा। कथा के दौरान दिया गया उनका भावुक बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था की भारी कमी पर प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है।

🙏 भारी भीड़, लेकिन सुरक्षा नदारद

कथावाचक युवराज पांडे ने मंच से कहा कि कथा पंडाल में रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, इसके बावजूद सुरक्षा के लिए दो पुलिसकर्मी तक तैनात नहीं किए गए। उन्होंने सवाल उठाया—

“क्या हमारी गलती सिर्फ इतनी है कि हम छत्तीसगढ़ के स्थानीय कथावाचक हैं?”

🚨 कलश यात्रा में चोरी, श्रद्धालुओं में डर

उन्होंने बताया कि कथा के पहले दिन आयोजित कलश यात्रा के दौरान सुरक्षा न होने का फायदा उठाकर चोरों ने कई श्रद्धालुओं की सोने की मालाएं चोरी कर लीं। इस घटना के बाद से कई भक्तों में डर का माहौल है और कुछ लोग कथा में आने से भी कतरा रहे हैं।

📝 लिखित आवेदन के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं

युवराज पांडे ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रशासन के सभी संबंधित विभागों को लिखित आवेदन दिए गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

फिलहाल पूरी व्यवस्था कुछ निजी बाउंसरों के भरोसे चल रही है, जो इतनी बड़ी भीड़ के लिए नाकाफी है।

❗ “अगर कोई अनहोनी हुई तो जिम्मेदार प्रशासन होगा”

भावुक होते हुए उन्होंने कहा—

“क्या कोई बड़ा टारगेट तय किया गया है कि महाराज को भीड़ में असुरक्षित छोड़ दिया जाए?”

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई भी अनहोनी होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। फिलहाल वे सब कुछ भगवान जगन्नाथ और छत्तीसगढ़ महतारी के भरोसे छोड़ चुके हैं।

🎶 छत्तीसगढ़ी शैली के लिए देशभर में मशहूर

आचार्य युवराज पांडे महज 10–12 वर्ष की उम्र से कथा वाचन कर रहे हैं। वे अपनी अनोखी छत्तीसगढ़ी शैली और पचरा गीतों के लिए देशभर में लोकप्रिय हैं।

उनकी सादगी, क्षेत्रीय भाषा में उपदेश और भावनात्मक प्रस्तुति के कारण दूर-दूर से श्रद्धालु उन्हें सुनने पहुंचते हैं।

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